मुझे क्या पता था तेरे होंठ जो
संग बैठ मेरे प्यार का इकरार किया करते थे
ओझल मेरी नज़रों से कहीं वोट में जाकर
कितने अजनबियों से हर प्यार का
व्यापार किया करते थे .
मुझसे तेरा प्यार तो था गहरा सा नाटक ही महज
मेरे दुश्मन थे तुम इक बेवफा मालूम ना था
ज़हर से हुस्न पर मासूमियत का लगा के नकाब
चेहरा धोखा भी है दे सकता ,ये मालूम ना था
जहां में हुस्न इश्क प्यार की दौलत वालो
पेट में जब ना हो रोटी तो प्यार कर देखो
भूख से मरते बदनशीब उन इंसानों से
प्यार पर मरने की कोई भी बात कर देखो
भूख तो देती है कर माओं से बच्चों को अलग
जवाँ गदराये हुए जिस्म भी बिक जाते हैं
भूख की मार से कोठों पे जवानी चढ़ती
पेट की आग में तो प्यार भी जल जाते हैं
इश्क किस बूते बनाएगा जहाँ को खुशहाल
सूखे चेहरों पे हंसी रोटियां ही लाती हैं
इश्क औ प्यार मोहब्बत ये सभी धोखे हैं
जब तलक पेट की खाई नहीं पट जाती है
साथ भी तूने दिया जब दिखी सिक्कों की चमक
दुखों के मोड़ पर तेरे हाँथ छूटे पाए थे
भूख और मुफलिसी में काम ना आया तेरा इश्क
दुनियां के शोषित और बेजार ही काम आये थे
आज दुनियां है मेरी प्यार की सच्ची दुनियां
जिसमे जो हुस्न है , वो भूखों की सच्ची दुनियां
भूख रोटी की हो ,या प्यार की, या इज्ज़त की
सच्चे लोगों की है ,है प्यार की सच्ची दुनियां
उसी दुनियां ने दिया है किसी एहसान का साया मुझको
उसी दुनियां ने है मेहमान बनाया मुझको
वही दुनियां है मेरा दीनो धरम प्यार वही
वही दुनियां है मेरी हुस्न मेरी चाह वही
माफ़ मैंने तो तुझे कर दिया लेकिन फिर भी
सोच की प्यार का व्यापार कहीं करते हैं ?
मारते उसको हैं जो दुनिया लुटाकर अपनी
किसी उल्फत भरी नज़रों के लिए मरते हैं ?
भूल जा अब तलक उन वादों को जो तूने किये
भूल जा अब तलक उन यादों को जो मैंने जिए
भूल जा अब तलक उल्फत के नाम सारे गुनाह
भूल मत करते नहीं प्यार के किसी नाम गुनाह
जन्म भर जो किये तूने वो मोहब्बत के गुनाह
किसी सच्ची सी मुहब्बत में दफ़्न कर देना
देखना फिर जो मिलेगा तुम्हें अब तक ना मिला
अपने आँचल में सितारे हैं जितने भर लेना .
होली की बधाई
1 दिन पहले



माफ़ मैंने तो तुझे कर दिया लेकिन फिर भी
प्रत्युत्तर देंहटाएंसोच की प्यार का व्यापार कहीं करते हैं ?
मारते उसको हैं जो दुनिया लुटाकर अपनी
किसी उल्फत भरी नज़रों के लिए मरते हैं ?
बढ़िया
कई बार आई हूँ आपके ब्लॉग पे कभी कुछ मिला नहीं .....बहुत कम लिखते हैं आप .......और आज ये लिखा तो शब्दों में काफी शदीद सी चोट है .....
प्रत्युत्तर देंहटाएंजहां में हुस्न इश्क प्यार की दौलत वालो
पेट में जब ना हो रोटी तो प्यार कर देखो
भूख से मरते बदनशीब उन इंसानों से
प्यार पर मरने की कोई भी बात कर देखो
सच है प्यार तो सिर्फ पैसे वालों का खेल है ...भूख से फुटपाथों पर तड़पते लोग प्यार मोहब्बत क्या जाने ......!!
राज सिँह जी,
प्रत्युत्तर देंहटाएंवन्दे!
हाइकू एक जापानी छंद है और उसे लिखने का विधान है:-
*कुल तीन पंक्तियां होती हैँ।
पहली पंक्ति मेँ पांच,दूसरी मेँ सात व तीसरी मेँ फिर पांच अक्षर होते हैँ
यानी
5
7
5
छोटे हाइकू मेँ
3
5
3
अक्षर होते हैँ।
मेरे ब्लाग पर हाइकू देखेँ।
omkagad.blogspot.com
बहुत जबरदस्त-मस्त रचना,धन्यवाद.
प्रत्युत्तर देंहटाएंsahi baat insaan ka pet kewal pyar se nahi rotiyo se hi bhrta hai.aakhi insaan roti ke bagair kab tak jinda rah sakta hai
प्रत्युत्तर देंहटाएं"इश्क किस बूते बनाएगा जहाँ को खुशहाल
प्रत्युत्तर देंहटाएंसूखे चेहरों पे हंसी रोटियां ही लाती हैं
इश्क औ प्यार मोहब्बत ये सभी धोखे हैं
जब तलक पेट की खाई नहीं पट जाती है "-
---vaah!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!क्या बात है, भूखे भजन न होय गुपाला...
'इश्क औ प्यार मोहब्बत ये सभी धोखे हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंजब तलक पेट की खाई नहीं पट जाती है'
- लेकिन यह भी सच है कि इंसान की भूख केवल पेट की भूख ही नहीं होती, मन की भी होती है.
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